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Ashok Kumar

Saturday 14th of November 2020 11:50:58 AM

Depawali

Respected members

May this Diwali is the brightest and the happiest time of the year for you….
Wishing you more success and wonderful health….
Wishing you and your family a very Happy,peaceful and prosperous Diwali.🪔🪔

Regards,
Ashok Kumar &Family.


अशोक कुमार

Thursday 8th of October 2020 09:44:19 PM

सूचना

पासवान समाज का नाम रोशन एवं गौरवान्वित करनेवाले, आदरणीय श्री राम विलास पासवान जी के निधन से देश एवं समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।
दिल्ली दुसाध परिवार के सभी सदस्यों की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं 😞😞💐💐


अशोक कुमार

Saturday 15th of August 2020 10:41:49 AM

स्वतंत्रता दिवस

आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
जय हिंद!
delhidusadhparivaar.org


अशोक कुमार

Saturday 23rd of May 2020 06:15:53 PM

जज्बा ज्योति कुमारी पासवान का

मई के इस गर्मी भरे मौसम और लॉक डाउन के समय में दुसाध समाज की बेटी 15 वर्षीय सुश्री ज्योति कुमारी पासवान , सुपुत्री श्री मोहन पासवान, ने अपने चोटिल, घायल और बीमार पिता को एक पुरानी साइकिल पर बैठाकर गुड़गांव ( हरियाणा )से दरभंगा (बिहार )करीब 1200 किलोमीटर दूर लेकर सही सलामत और सुरक्षित पहुंच गई यह ज्योति पासवान के शौर्य ,बहादुरी और जज्बे एवं दुसाध समाज के प्राचीन वीरगाथा को दर्शाता हैl दुसाध परिवार इस बहादुर बेटी को सलाम करता है


Ashok kumar

Thursday 7th of May 2020 10:08:34 AM

बुद्ध पूर्णिमा

शांति और अहिंसा के प्रतीक, भगवान बुद्ध को नमन!
आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं
दिल्ली दुसाध परिवार
घर पर रहें, सुरक्षित रहें
delhidusadhparivaar.org


ashok kumar

Tuesday 14th of April 2020 10:23:18 AM

Ambedkar Jayanti

Wish you all a very happy Ambedkar Jayanti
Delhi Dusadh Parivaar
delhidusadhparivaar.org
Stay home, Stay safe


ashok kumar

Tuesday 14th of April 2020 10:18:37 AM

अंबेडकर जयंती

डॉ.अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
दिल्ली दुसाध परिवार
delhidusadhparivaar.org
घर पर रहें सुरक्षित रहें


अशोक कुमार

Tuesday 14th of April 2020 02:24:47 AM

भारत रत्न डॉक्टर भीम राव अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल

प्रिय सदस्यगण जैसा कि हमें ज्ञात है कि आज 14 अप्रैल है और हमारे आदरणीय बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की जयंती है हम लोग हर वर्ष किसी न किसी रूप में बाबा साहब की जयंती मनाते हैं और उनके बताए हुए रास्तों पर चलने की कोशिश करते हैं जैसा कि हम जानते हैं कि बाबा साहब ने कहा था शिक्षित बनो ,संगठित हो ,और संघर्ष करो lआज के परिपेक्ष्य में हमें बहुत ही ज्यादा शिक्षित और संगठित होने की आवश्यकता है lहमारे बीच आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से हम लोग आपस में तीव्र गति से एक दूसरे से संपर्क में आते रहते हैं और इस प्रकार हम लोग एक दूसरे से जुड़े हुए रहते हैंl अगर हम शिक्षित और संगठित होकर रहते हैं तो यही बाबा साहब के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी , परंतु विडंबना यह है कि हम सभी छोटे-छोटे ग्रुप और कुटुंब में बैठे हुए हैं और जान बूझकर एक दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं और इस भागदौड़ में हमारे लोग जो कमजोर तबके से हैं पीछे रह जाते हैं उनका सुनने वाला कोई भी नहीं है l इस बीच की दूरी को मिटाने के लिए दिल्ली में दुसाध समाज के लोगों ने मिलकर एक सोसाइटी जिसका की नाम है दिल्ली दुसाध परिवार बनाया और इसी सोसाइटी के माध्यम से दिल्ली और देश के अन्य कोने में रहने वाले दुसाध बंधु जुड़े हुए रहते हैंl चूंकि इस वर्ष कोरोना महामारी का आतंक पूरी दुनिया और हमारे देश में भी फैला हुआ है इसलिए इस वर्ष बंधुओं से निवेदन है कि वह घर पर ही बाबा साहब की जयंती धूमधाम से मनाएं और इस क्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करें अंत में मैं दुसाध बंधुओं से विनम्र निवेदन करना चाहता हूं कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने की कोशिश करें और उन्हें बाबा साहब के बताए हुए रास्तों का अनुसरण करने के लिए कहेl
घर पर रहें ,सुरक्षित रहें
दिल्ली दुसाध परिवार


Ashok Kumar

Wednesday 18th of March 2020 06:27:14 PM

कोरोना से बचाव

फिर सदस्यगण नमस्कार
जैसा कि आप सभी को ज्ञात है कि भारत सहित पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप आजकल सुर्खियों में हैl इस विषय पर आप सभी सदस्यगण से निवेदन है कि आप लोग इस कोरोना वायरस से बचने के लिए आवश्यक कदम जरूर उठाएं जैसे कि बार-बार सैनिटाइजर /साबुन से हाथ धोना, संक्रमित व्यक्तियों से दूर रहना , अपने पुरे घर को सेनेटाइजर से सेनेटाइज करना और संदेह होने की स्थिति में निकट के हस्पताल में चेकअप करवाना इत्यादिl छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें, जागरूक रहें और याद रखें आपकी जानकारी ही बचाव है l आजकल हाथ मिलाने से बेहतर है कि नमस्ते का प्रयोग करें👏
जनहित में जारी

दिल्ली दुसाध परिवार


अशोक

Tuesday 10th of March 2020 08:54:30 AM

रंगों का त्योहार होली

💐 प्रिय स्वजातीय बंधु आपको एवं आपके परिवार को होली के पावन पर्व की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं l आप सभी का जीवन होली के पावन रंगों की तरह खुशी ,हर्ष, उमंग एवं उल्लास,से हमेशा भरा रहे ऐसी ईश्वर से हमारी प्रार्थना एवं कामना है। ईश्वर आप सभी की हर मनोकामना को पूरी करें l होली के इस शुभ अवसर पर दिल्ली दुसाध परिवार आपकी और आपके परिवार की उज्जवल भविष्य की कामना करता है l
सादर👏
दिल्ली दुसाध परिवार
delhidusadhparivaar.org
🌹💐 हैप्पी होली।💐🌹


Ashok Kumar

Sunday 8th of March 2020 09:00:23 AM

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

प्रिय सदस्य नमस्कार, आज 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर सभी महिला सदस्यों को दिल्ली दुसाध परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं l
विनीत👏👏
एडमिन /सह एडमिन
delhidusadhparivaar.org


ASHOK

Sunday 26th of January 2020 06:06:36 AM

KUMAR

आपको एवं आपके परिवार को गणतंत्र दिवस ,26 जनवरी की हार्दिक शुभकामनाएं
जय हिंद!
--दिल्ली दुसाध परिवार
delhidusadh parivaar.org


ASHOK

Sunday 26th of January 2020 06:05:19 AM

KUMAR

May the pride of tri-colour add more colours to your life.
Happy Republic Day
Jai Hind!
--Delhi Dusadh Parivaar
delhidusadhparivaar.org


ASHOK KUMAR

Wednesday 1st of January 2020 01:07:19 PM

New Year Wish

Wishing you a new year full of joy, prosperity, success & good luck, Happy New Year, 2020.

Regards,
Delhi Dusadh Parivaar (Regd.)
9310397440
9818332543
delhidusadhparivaar.org


ASHOK KUMAR

Wednesday 1st of January 2020 01:04:39 PM

New Year Wish

नया साल आपके जीवन में सफ़लता, सौभाग्य, उन्नत्ति एवं खुशियाँ लेकर आये I नव वर्ष, 2020 की हार्दिक शुभकामनायें,

सादर,
दिल्ली दुसाध परिवार (पंजी०)
9310397440
9818332543
delhidusadhparivaar.org


ASHOK KUMAR

Saturday 28th of December 2019 05:03:00 PM

EK BAAT

आदरणीय स्वजातीय बंधु, नम्स्कार!
सबसे पहले मैं आपको आने वाले नव वर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनायें एवं बधाई प्रदान करना चाहता हूँ जैसा कि आप सभी को विदित है कि दिल्ली दुसाध परिवार (पंजीकृत) पिछले कुछ सालों से दिल्ली में स्वजातीय परिवार के सदस्यों के साथ बैठक समारोह होली मिलन वार्षिक सम्मेलन गोष्ठी आदि का अयोजन दिल्ली दुसाध परिवार के तत्वाधान में आयोजित करता आ रहा है मायापुरी (दिल्ली) में संत शिरोमणि बाबा चौहरमल जी के मंदिर का जीर्णोद्धार भी दिल्ली दुसाध परिवार के द्वारा ही किया गया है और भी दुसाध जाति के महापुरुषों के पूजा स्थल (दिल्ली) के नवीनीकरण के लिए स्वजातीय बंधुओं के द्वारा समय समय पर बैठको में माँग उठाया जाता रहा है जिस पर विचार विमर्श जारी है | स्वजातीय बंधुओं के लिए चिकित्सा सहायता भी मुख्य एडमिन(दिल्ली दुसाध परिवार) श्रीमान अजय जी के द्वारा यथा संभव किया जा रहा है क्योंकि फिलहाल वे दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में पदस्थापित हैं | मैट्रीमोनियल मैटर भी साथ- साथ दिल्ली दुसाध परिणय पुंज व्हाट्सएप ग्रुप के नाम से सक्रिय रूप से काम कर रहा है एवं जिस पर सुयोग्य वर/वधु हेतु स्वजातीय बन्धु स्वतंत्र रूप से बायोडाटा शेयर कर रहे हैं और ये बिलकुल मुफ्त है परन्तु इसका कितना लाभ दुसाध परिवार को मिला है ये आकलन करने का विषय है| महापुरूषों के जयन्ती, राष्ट्रीय महत्व के पर्व, नव वर्ष एवम् विशिष्ट समारोह इत्यादि के अवसर पर केन्द्रीयकृत संदेश भी सामान्य एस.एम.एस. के माध्यम से किया जा रहा है जिससे की ज्यादा से ज्यादा स्वजातीय बंधु समाज से जुड़ सके। इसी कड़ी में दिल्ली दुसाध परिवार का एक वेबसाइट भी तैयार कर सक्रिय कर दिया गया है स्वजातीय बंधुओं को इस वेब साइट से पंजीकृत होकर एकता एवम् सहयोग का परिचय देना चाहिए वेबसाइट का नाम delhidusadhparivaar.org है एवम् वेबसाइट को बनाने में सभी बातों का विशेष ध्यान रखा गया है बाकी इसके उपयोग में आने के पश्चात इसे और भी बेहतर किया जाएगा | सोशल मीडिया जैसे कि फ़ेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम आदि पर भी दिल्ली दुसाध परिवार सक्रिय है | देवीयों एवम् सज्जनों किसी भी सोसायटी/ग्रुप को सुचारू रूप से चलाने के लिए आर्थिक सहायता की अत्यंत आवश्यकता होती है। इस संबंध में यह सूचित किया जाता है कि दिल्ली दुसाध परिवार का एक राष्ट्रीयकृत बैंक दिल्ली में बचत खाता खुला हुआ है और उसकी विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है यदि कोई भी स्वजातीय बन्धु खातें में स्वेच्छा से रकम जमा करना चाहें तो समाज के हित में जमा करा सकते हैं। परन्तु दुसाध समाज की बिडम्बना यह है कि स्वजातीय बंधु समारोह, बैठक, गोष्ठी, मिलन समारोह, वार्षिक सम्मेलन इत्यादि में बढ-चढ़ कर हिस्सा तो लेते हैं परन्तु कोई प्रतिपुष्टि/प्रतिक्रिया कभी भी किसी भी माध्यम से दिल्ली दुसाध परिवार या एडमिन / सह एडमिन को प्रेषित करने का कष्ट नहीं करते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि समाज आगामी सुधारों से वंछित रह जाता है। अंत में स्वजातीय बंधुओं से नम्र निवेदन है कि इस मिशन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुड़े और समाज की उन्नति में योगदान दें | जय भीम! जय बाबा चौहरमल!
सादर
दिल्ली दुसाध परिवार (पंजी.)


Rakesh Kumar

Friday 27th of December 2019 11:35:41 AM

NEW YEAR

Wishing you a new year, full of joy, prosperity, success & good luck . Happy New Year, 2020.


Rakesh Kumar

Friday 27th of December 2019 11:21:58 AM

DUSADH HISTORY

दुसाध कब हुए ? कब से है ? इसका गौरवमय अतीत कहाँ से शुरू हुआ ?


यह प्रश्न बार-बार उठता है, कि बिहार में दुसाधों का काल क्या है ? सर एम० जे० हेलेट, लेफ्टिनेंट गवर्नर, बिहार के अनुसार दुसाध उत्तर बिहार की अति प्राचीन जाती है। के.पी. जयसवाल, रिसर्च इंस्टीट्यूट, पटना के वर्ष 1963 में प्रकाशित रिपोर्ट (जी० कनिचम एवं गैरिक द्वारा वर्ष 1980-81 में प्रकाशित सामग्री पर आधारित) में उत्तर बिहार के कुछ "दुसाध राज्यों" का ब्यौरा मिलता है। बिहार (उत्तरी बिहार) में बहुत से ऐसे प्राचीन स्थल पाये गए हैं, जिनका सम्बन्ध "दुसाध अधिपतियों" से रहा है, जो कि निम्नलिखित हैं :- (१) हाज़ीपुर से करीब 12 मील उत्तर-पूर्व मुजफ्फरपुर रोड पर इमादपुर गढ़ी है। इसके बारे में लिखा गया है कि यह एक "दुसाध अधिपति" की गढ़ी थी। जिसकी खुदाई में जो ईट मिली है, उसका ढांचा और निर्माण की तकनीक ईसा पूर्व 200 पहले जैसा है, यानी कि ईसा पूर्व 200 के आस-पास भी दुसाधों का राज था। (२) "नोनाचार ग्राम मोतिहारी से ७ मील उत्तर-पूर्व सिकरहना नदी के तट पर है। यह भी नोनाचार नामक दुसाध अधिपति की गढ़ी कही गई है। इसका काल ईसवी संवत का प्रारंभिक सदी कहा गया है। (३) इसी नोनाचार से सम्बंधित एक अन्य गढ़ी, सुबेर गढ़ का जिक्र आता है। यह मुजफ्फरपुर से कोई १८ मील उत्तर-पस्चिम जोगा नदी के तट पर है। (४) "मैथिली प्रकाशन समिति, कलकत्ता द्वारा प्रकाशित, श्री मणि पदम द्वारा मैथिली में ही लिखित 'राजा सलहेश' मुखपात में लिखा है कि---'अनुमानतः पंचम-छठम शताब्दी रहल हेतैक राजा सलहेशक काल' था। उनका क्षेत्र बेगूसराय जिला के पोखरिया से लेकर उत्तर में मोरंग (नेपाल) तक कहा गया है।" इससे दो बातें सिद्ध होती है, (१) उत्तर बिहार में दुसाधों के राज्य थे, आज से कोई २००० वर्ष पूर्व के आस-पास और (२) यह उस क्षेत्र के पुराने वासी थे और तब भी ये दुसाध कहे जाते थे। (क) "राजा चौहरमल" चौहरमल नाम को कुछ लोगों द्वारा अपभ्रमित करके "चुहर मल" भी कहते हैं, जो बिल्कुल असंगत एवं अशोभनीय है। इनके नाम का अर्थ इस प्रकार समझना होगा जैसा कि नाम से ही विदित होता है कि 'चौ' अर्थात चारों तरफ 'हर' अर्थात हराना और 'मल' अर्थात लड़ाई द्वारा। जिस तरह उत्तर बिहार में "राजा सहलेश" की गाथा प्रचलित है, उसी प्रकार दक्षिण बिहार में "बाबा चौहरमल" कि ख्याति भी प्रचलित है। इनकी धर्म परायण वीरतापूर्ण गाथा लोक-गीतों और लोक-कथाओं के रूप में गंगा नदी के कछार प्रदेश में अनवरत गूंजती रहती है। उपरोक्त गाथा " बिहार इन फोक लोर स्टडी" में श्री एन० शर्मा का अध्ययन "मगध गीतों की झांकी" है। इसमें इन्होंने कहा है कि मोकामा के निकट अंजनी गांव में जन्मे चौहरमल दुसाध जाति के एक वीर और संयमी पुरुष। श्री अर्जुन प्रसाद "बनजारा" द्वारा रचित एक लघु पुस्तिका" "बाबा चौहरमल इतिहास के आईने में" में लिखा है कि "सर्वप्रथम बाबा चौहरमल का पुण्य महोत्सव मनाने का गौरव कुछ ही लोगों को प्राप्त हुआ, सन १९३५ की चैती पूर्णिमा के दिन स्व० रामकिशुन दास, स्व० ताराचंद दास एवं अन्य लोगों द्वारा आयोजित महोत्सव, मोकामा में करीब २००० हजार लोगों ने भाग लिया था, उसके उपरान्त समय-समय पर यह महोत्सव का सिलसिला जारी रहा। मोकामा (अंजनिगढ़ या अंजनी नगर) की धरती पर बिहारी राम की धर्म पत्नी राघवन देवी के गर्भ से एक विशाल वैक्तित्व बालक के रूप में जन्म हुआ । मोकामा में चारडीह नामक एक स्थान है, जहाँ बाबा चौहरमल का अखाड़ा था । उनके नाम से आज भी १२ बीघा का टाल है। प्रत्येक वर्ष उसी स्थान पर एक विशाल मेला का आयोजन किया जाता है जहाँ पर एक ही समुदाय के यानी कि हजारों की संख्या में दुसाध जाती के बच्चें, स्त्री-पुरुष, बुज़ुर्ग एक होकर बाबा चौहरमल की पूजा-अर्चना करते हुए उस वीरान जगह पर रात-भर रहते हैं। इस अतीत की गौरवशाली पवित्र स्थान और मेला का साक्ष्य प्रणाम डॉ० एस० राम द्वारा रचित लघु पुस्तिका " दुःसाध्य से दुसाध तक" के लेखक स्वयं एवं स्व० सखीचन्द पासवान तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय दुसाध उत्थान परिषद और राष्ट्रीय सचिव के द्वारा उक्त स्थान पर जाकर इसका प्रत्यक्ष रूप से सत्यता की खोज-बिन किये और बिल्कुल सत्य पाया गया। आज भी इनकी गाथा "रेशमा-चौहरमल" आख्यान से गीतों और लोक-कथाओं से पूरे बिहार, उत्तरप्रदेश, बंगाल, उड़ीसा और मध्यप्रदेश में गूँजती है । (ख) "राजा मकरा मांझी" हमारे दुसाध जाति के गौरवशाली इतिहास में एक और शूरवीर, इनका दूसरा नाम मंझमकरा भी था। बिहार के सारण जिला के माँझीगढ़ का भग्नावशेष किला अभी भी विद्यमान है। छपरा (सारण) के दुसाध अपने नाम के आगे आज भी मकरा मांझी की स्मृति में मांझी उपनाम रखते हैं। डॉ० एस०पी० राम, लेखक एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय दुसाध कल्याण परिषद, स्व० सखीचन्द पासवान, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय दुसाध उत्थान परिषद, और श्री रामबालक पासवान, पूर्व सचिव एवं श्री रामचन्द्र पासवान, मुजफ्फरपुर के साथ पूरे किले का ११ अक्टूबर, १९६२ गहन छान-बिन के पश्चात सत्यता का प्रमाण मिला। (१) "राजा सहलेश (शैलेश)"-- डॉ० ग्रियर्सन की महान कृति "मैथिस कृश्टोमैथि" सन १८८२ में प्रकाशित हुई थी, इसमें उत्तर बिहार में मैथिल क्षेत्र से लेकर मोरंग प्रदेश, नेपाल तक विस्तारित भूभाग में "दुसाध राजा सहलेश" का बड़ा भव्य जिक्र किया गया है। डॉ० बुचनान फ्रांन्सिस ने अपनी "पूर्णिया रिपोर्ट" में लिखा है कि "राजा सहलेश" जोकि दुसाध जाति के थे और शौर्यवीर, पराक्रमी और प्रतापी राजा थे। आगे भी वे लिखते हैं --- "राजा सहलेश" (शैलेश) अपने पराक्रम, प्रताप और योगबल से कभ-कभी पृथ्वी पर नहीं मिलते थे तथा अपने ब्रह्मचरत्व की शक्ति से शेर की पूंछ पकड़ कर उत्तर बिहार से नेपाल की तराई और बंगाल तक चले जाते थे।" राजा सहलेश (शैलेश) के चरित्र की परिमामय उज्ज्वलता और ऊंचाई की किंचित आभास 'श्री मणिपद्म' द्वारा लिखित "राजा सहलेश" में उल्लेख है। कुल १३३ पृष्ठों की यह पुस्तक "मैथिली प्रकाशन समिति" कोलकाता द्वारा १९७३ ई० में प्रकाशित हुई। इसकी प्रकाशन टिप्पणी में श्री उदित नारायण झा, अध्यक्ष "मैथिल प्रकाशन समिति" ने कहा है कि "राजा सहलेश अपना युग मे अत्याधिक सम्मानित और पूजित वैक्तित्व छलाह।" पुस्तक- परिचय में श्री इन्द्रगोविंद झा ने कहा है कि "राजा सहलेश मिथिलाक एकटा एहेन विभूति एवं वैक्तित्व छलाह जे कोनों इतिहास आ साहित्य में यदि अलभ्य नहीं तो दुर्लभ अवश्य अछि।' उन्होंने महाराज सुयोग की उक्ति "जयवर्धन राजा सहलेश एकटा एहेन गरिमामय राजा छाती जे राजेश्वर आ लोकेश्वर दुनु छथि।" स्वयं लेखक इसके "मुखपात" में कहा है कि राजा सहलेश "मैथिली कंठ-महाकाव्यक रूप में एकटा अमर" गाथा अछि, उत्तर भारत के अधिकांश ग्राम में गामक सीमा पर बढ़ अथवा पीपर के गाछ तर एकटा मंडप में, राजजीक थान अवश्य भेदत, हज़ार कष्ट, भय, आतंक की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी "बन देवी कुसुमा मालिन आ दुसाध राजा सहलेश के गोहराऊ, त्राण भेटवे करत।" राजा सहलेश के काल-समय का आभास लेखक ने अपनी लेख में दिया है कि "अनुमानतः पंचम-छठम शताब्दी रहल हेतैक राजा सहलेश काल, ई गाथा स्वतः कहैत ऐसी जे सलहेसक काल गोचर युग आ कृषि युगक सन्धिकाल रहल हैत।" राजा सलहेश एक साथ ही महापराक्रमी योद्धा और देवी शक्तियों से सम्पन्न महान यति भी थे। "डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी" मानते है कि राहु बाबा ही दुसाधों के ईष्ट देवता हैं। ग्रह मंडली में राहु देवता का समावेश भी दुसाधों की देन है। इसका अर्थ यह हुआ कि दुसाध उस पुराने जमाने में कबीले के वंशज है, जिन्होंने राहु की अभ्यर्थना की होगी। यानी कि दुसाध भारत की प्राचीनतम जातियों में से ही है। दूसरी ओर गहलौत मताबलम्बी का मानना है कि यह राजा राहुप की पूजा है, या राहुप द्वारा की गई पूजा की याद। राजा राहुप शत्रुओं पर विजय पाने की कामना से सूर्य कुण्ड किनारे प्रत्येक सुबह सूर्य नमस्कार कर खड्डग और अग्नि की पूजा अर्चना करते थे। राजा राहुप १२०१ ई० में राज गद्दी पर बैठे थे। यह यदि उनकी ही पूजा है तो इसका प्रचलन इसी के बाद हो सकता है। एक बात और, इसी प्रकार के मिलते-जुलते अनुष्ठान कुछ अन्य प्राचीन जातियों (आदिम जातियों) के यहाँ भी हुए हैं। छोटानागपुर और मध्यप्रदेश तथा उड़ीसा के गहरे आदिवासी क्षेत्रों में अधिक प्रचलन है। जिनमे सभी जगह उसी तरह "अग्नि-क्यारी' बनाई जाती है और "भोगता" तथा "भक्त" दोनों ही उसी तरह दहकते अंगारो से, नंगे पांव गुजरते हैं। छोटानागपुर में तो उसी तरह दो बड़े ऊंचे खम्बे गाड़े जाते हैं, उनके बीच अधर में लटकती हुई झुलालूमा पटरी बाँधी जाती है, उनमे लगी लोहे की हुक से 'भोगता' नंगे बदन टंग जाता है। भजन चलते रहते हैं और पटरी चक्कर काटती रहती है। इसे वे लोग "मण्डा-झूलना' कहते हैं। दुसाध समुदाय में या दुसाधों के संदर्भ में कब-कब और कितनें ऐसे "देव-पुरुष" हुये हों समुचित विस्तृत खोज और गहन अध्ययन से कदाचित कुछ नई बातें और नये वैक्तित्व प्रकाश में आये। उपरोक्त प्रस्तुति सोशल मीडिया के माध्यम से लिया गया है I


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